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| image source: the indian wire |
Consumer Protection Bill 2018: केंद्र सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2018 (consumer protection bill 2018) को पेश किया है जिसका मुख्य उद्देश्य है उपभोक्ता अधिकारों का संरक्षण करना | इस विधेयक की मुख्य बात यह है कि इसके अंतर्गत एक एजेंसी जिसका नाम होगा केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम उसकी स्थापना की जाएगी | इस एजेंसी का मुख्य उदेश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों का संरक्षण करना होगा और इसके अतिरिक्त इस एजेंसी के पास उत्पाद के द्वारा व्यक्तिगत नुकसान, सम्पति का नुकसान या फिर कोई शारीरिक रूप से शिकायत होने की जाँच, जुर्माना, उत्पादन की वापसी आदि के अधिकार होंगे |
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2018 (Consumer Protection Act 2018) को उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री राम विलास पासवान ने 5 जनवरी को लोकसभा में पारित किया था | इस नए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को 1986 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (consumer protection act) की जगह पास किया है | इस अधिनियम के तीन मुख्य उद्देश्य है |
जिसमे सबसे पहले है उपभोक्ता, कोई भी व्यक्ति जो कोई वस्तु खरीदता है या किसी सेवा का उपयोग करता है उपभोक्ता (consumer) कहलाता है | वह व्यक्ति उपभोक्ता नहीं कहलाता पुनः बेचने के लिए या अन्य किसी व्यपारिक उद्देश्य से खरीदता है | उपभोक्ता के अंतर्गत वह सभी व्यक्ति उपभोक्ता के वर्ग में शामिल होता है जो बाजार से या फिर ऑनलाइन माध्यम से उत्पाद और सेवाओं को खरीदता और उसका इस्तेमाल करता है |
उपभोक्ता के अधिकार के अंतर्गत उन वस्तुओ और सेवाओं को उपभोक्ता में सुरक्षित करता है जोकि मनुष्य के जीवन को नुकसान पंहुचा सकती है | शॉपकीपर को वस्तु और सेवाओं की मात्रा, गुड़वक्ता, शुद्धता और मूल्य आदि के बारे में सूचित करना अनिवार्य होगा | गलत या फ्रॉड बिज़नेस के उपयोग पर सजा का प्रावधान है, इसलिए बिजनेसमैन किसी प्रकार के उपभोक्ता फ्रॉड (consumer fraud) करने से सावधान रहे |
उपभोक्ता के अधिकार के रक्षा के लिए सरकार के द्वारा उपभोक्ता संरक्षण समिति (consumer protection committee) की स्थापना की | यह उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन, गलत विज्ञापनों, गलत व्यपार से उपभोक्ता के अधिकारों का संरक्षण (protection) करेगी | इस समिति के अंतर्गत एक जाँच दल होगा, जोकि गलत व्यपारी मामलो की जाँच करेगा |
जानते है इसकी मुख्य विशेषताएं क्या है :
- इस विधेयक के अंतर्गत एक उपभोक्ता संरक्षण समिति (consumer protection committee) बनाने का निर्णय लिया गया है, जिसके द्वारा उपभोक्ता के विवादों को हल किया जायेगा |
- उपभोक्ता संरक्षण समिति (consumer protection committee) के पास जिला स्तर पर 1 करोड़ रुपये के मामलो पर सुनवाई की जा सकेगी, जबकि राज्य स्तर पर सीमा 10 करोड़ तक होंगी | उपभोक्ता के पास कोई कमी पायी जाने पर समिति उत्पाद को वापस लौटाने, उसकी कीमत लौटाने, जुर्माना लगाने का प्रावधान लागू करेगी |
- यह समिति दोषी व्यक्तियों और संस्थानों पर लगभग 10 लाख तक का जुर्माना लगा सकती है और दूसरी बार दोषी पाए जाने पर यह जुर्माना 50 लाख रुपये तक खींचा जा सकता है |
- इस समिति के द्वारा गलत विज्ञापनों पर रोक लगाई जाएगी और ऐसी स्थिति में दोषी पाए जाने पर 2 साल की सजा का प्रावधान है और यदि फिर भी यह गलती दोहराई गयी तो सजा बढ़ा कर 5 साल तक हो सकती है |
- इस नए प्रावधान के अनुसार विज्ञापन में काम करने वाले व्यक्तियों को भी विज्ञापन में दिखाए जाने वाली वस्तुओ और उत्पाद की जाँच की जिम्मेदारी होंगी |
- विज्ञापन में किसी भी तरह की गलत जानकारी प्राप्त होने पर प्रसिद्ध व्यक्ति पर भी एक साल का प्रतिबन्ध लगाया जायेगा और दुबारा यह गलती दोहराने पर एक साल से बढ़ा कर तीन साल तक कर दिया जायेगा |
- उपभोक्ता के संरक्षण (protection) में दिए गए आदेशों का पालन ठीक उसी तरह से होगा जिस तरह से कोर्ट के आदेशों का पालन होता है |
- उपभोक्ता के हितो में संरक्षण (protection) के लिए राष्ट्रीय आयोग किसी भी योग्य व्यक्ति या संसथान की मदद ले सकता है | इस नए विधेयक के अंतर्गत उपभोक्ता शिकायत (consumer complaint) की स्थिति में अपनी शिकायत ऑनलाइन (complaint online) कर सकता है और सुनवाई भी वीडियो कॉन्फ्रेन्स के द्वारा उतनी ही जल्दी हो जाएगी |
जानते है इस विधेयक के अंतर्गत किन किन मामलो पर सुनवाई की जाएगी :
- इस विधेयक के अंतर्गत अनुचित अनुबंध पर सुनवाई की जाएगी | अगर किसी भी तरह से उपभोक्ता के अधिकारों (rights of consumer) का हनन होता है तो उस पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है |
- यदि किसी उत्पादक द्वारा ख़राब माल बेचा जाता है और अच्छी सेवाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती तो इन सभी मामलो की सुनवाई इस विधेयक के अंतर्गत की जाएगी |
- अगर किसी विक्रेता द्वारा मिलावटी सामान बेचा जाता है या उसे रखा जाता है तब भी उपभोक्ता इस विधेयक के अंतर्गत शिकायत (complaint) कर सकता है |
- अगर सेवा प्रदाता द्वारा समय पर सेवा प्रदान नहीं की जाती तो इस विधयेक के अंतर्गत के उपभोक्ता शिकायत दर्ज कर सकता है |
- ऑनलाइन खरीदारी (online shopping) करवाने पर पहले मूल्य चुकाने और बाद में वस्तु नहीं उपलब्ध कराने, गलत वस्तु उपलब्ध कराने पर और वस्तु वापस करने पर पैसा वापस न होना जैसे मामलो की सुनवाई इस विधयेक में सुनवाई की जाएगी |
- अगर किसी सेवा द्वारा आपके सामान और सेवा का गलत विज्ञापन किया जाता है तो उपभोक्ता को गलत जानकारी प्रदान करता है | इस स्थिति में भी इस विधेयक में सुनवाई की जाएगी |
- इस संशोधन के द्वारा उपभोक्ता मामलो (consumer affairs) की सुनवाई जल्दी हो पायेगी और विक्रेता और संस्थान पर करवाई उचित हो सकेगी और उनके अन्दर दर भी बना रहेगा |
अगर आपकी कोई भी उपभोक्ता शिकायत (consumer complaint) है तो अपनी उपभोक्ता शिकायत ऑनलाइन दर्ज (file complaint online) करे |

