Showing posts with label Indian kanoon. Show all posts
Showing posts with label Indian kanoon. Show all posts

Friday, 12 April 2019

Indian Penal Code Section 503 (भारतीय दंड सहिंता की धारा 503) (पत्नी या गर्ल फ्रेंड सुसाइड की धमकी दे तो जानिए क्या करे? )

भारतीय दंड सहिंता की धारा 503 यह कहती है कि अगर कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को, या उसकी प्रतिष्ठा को, संपत्ति को, चोट पहुंचने कि धमकी देता है | यह किसी ऐसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को खराब करने की धमकी देता है | जिसपे उस पहले व्यक्ति का दिलचस्पी है यानि उसके माँ बाप, उसके भाई, या बहन को या फिर कोई ऐसा काम करने की धमी देता है, जिसको करने के लिए वह कानूनी तौर बाध्य नहीं है, तो यह आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation) का केस बनता है |     

Criminal Intimidation (आपराधिक धमकी) : अगर कोई व्यक्ति आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation) का क्राइम करता है | तो उसको क्या सजा होंगी यह भारतीय दंड सहिंता की धारा 506 (Indian Penal Code Section 506)  में बताया गया है | 

अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति को कोई ऐसी धमकी देता है जो  भारतीय दंड सहिंता की धारा 503 (Indian Penal Code Section 503)में बताई गयी है | तो उसे दो साल तक की सजा या जुर्माना या फिर सजा और जुर्माना दोनों हो सकती है | लेकिन अगर धमकी गंभीर चोट (grievous hurt) पहुंचाने की या फिर जान से मरने की दी गयी है तो उसमे 10 साल तक की सजा या जुर्माना या दोनों ही होने का प्रावधान है | 

अगर किसी की पति या फिर गर्ल फ्रेंड या फिर कोई व्यक्ति आत्महत्या (suicide) करने की धमकी देता है तो सबसे पहले आपको उनसे बात करनी चाहिए और कोई हल निकलना चाहिए | लेकिन आप उससे बात नहीं करना चाहते है या फिर आपने बात की है पर कोई हल नहीं निकल रहा है | तब आप कानून का सहारा ले सकते है | 


अगर पत्नी या गर्ल फ्रेंड या कोई भी व्यक्ति आपको आत्महत्या (suicide) करने की धमकी देता है | कोई भी ऐसा काम कराने के लिए जिसके लिए आप कानूनी रूप से बाध्य नहीं है | जैसे कि आपकी बीबी आपसे कहे कि मुझे गहने दिलवाइये या फिर मुझे अलग घर दिलवाइये वरना में आत्महत्या (suicide) कर लूंगी या फिर आपकी प्रेमिका आपसे कहती है कि मुझसे शादी कर लो नहीं में आत्महत्या (suicide) कर लूंगी तो यह सब Criminal Intimidation (आपराधिक धमकी) में आता है | इसके लिए आप Police Station में शिकायत कर सकते है | अगर कोई आपको आत्महत्या (suicide) करने कि धमकी दे | तो आपको एक आवेदन देना चाहिए डिटेल में क्या मामला था और क्या इसमें हो रहा है | इसके बाद आपको पुलिस स्टेशन में जाकर दे देना चाहिए कि यह व्यक्ति  आत्महत्या (suicide) करने की धमकी दे रहा है | अगर यह आत्महत्या (suicide) कर लेता है तो इससे मेरा कोई भी लेना देना नहीं होगा | 

इसी तरह से शादी के बाद कोई पत्नी 498A केस करने की धमकी देती है यह फिर कहती है कि पुरे परिवार को जेल में डलवा दूंगी तो यह भी Criminal Intimidation (आपराधिक धमकी) में आता है | इसके लिए भी आप पुलिस स्टेशन में केस कर सकते है | 


अगर कोई आत्महत्या (suicide) कर लेता है और सुसाइड नोट छोड़ता है या फिर घर वाले यह इल्जाम लगते है कि आपने ही सुसाइड के लिए उकसाया था या फिर आपने ही उसकी मौत का कारण है तो पुलिस आपको गिरफ्तार करेगी Indian Penal Code Section 503 के तहत लेकिन किसी के कह देने या फिर सुसाइड नोट से आप क्रिमिनल नहीं हो जाते है | बल्कि पुलिस पहले जाँच पड़ताल करेगी और उसमे देखेगी कि आपको उस व्यक्ति से क्या सम्बन्ध था | आपके उनके साथ कैसे रिश्ते थे और आप उनके सुसाइड के लिए जिम्मेदार है या नहीं | 

अगर जिम्मेदार मने जाते है तो आपके ऊपर 306 का केस चलेगा और नहीं माने जाते है तो उससे बरी कर दिया जायेगा | 

यहाँ पर आपको एक चीज और जानने कि जरूरत है Indian Penal Code Section 503 और Section 506 सिर्फ सुसाइड की धमकी के लिए नहीं है | बल्कि कोई भी व्यक्ति आपकी प्रतिष्ठा को ख़राब करने की धामी देता है, या फिर आपकी प्रॉपर्टी को नुकसान पूछने की धमकी देता है या फिर आपको जान से मारने की धामी देता है  या चोट पहुंचाने की धमकी देता है तो आप उसके खिलाफ केस दर्ज कर सकते है |

अगर आपकी किसी भी प्रकार की उपभोक्ता शिकायत (consumer complaint) का समाधान चाहते है तो Voxya consumer complaint website पर शिकायत दर्ज करे |


IF YOU ARE LOOKING FOR SOLUTION 
OF CONSUMER COMPLAINT THEN 

Friday, 1 February 2019

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2018 (Consumer Protection Bill 2018 - Amendment in Consumer Protection Act 1986 in Hindi - Consumer Complaints Forum)

consumer protection bill 2018
image source: the indian wire
Consumer Protection Bill 2018: केंद्र सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2018 (consumer protection bill 2018) को पेश किया है जिसका मुख्य उद्देश्य है उपभोक्ता अधिकारों का संरक्षण करना | इस विधेयक की मुख्य बात यह है कि इसके अंतर्गत एक एजेंसी जिसका नाम होगा केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम उसकी स्थापना की जाएगी | इस एजेंसी का मुख्य उदेश्य उपभोक्ताओं के अधिकारों का संरक्षण करना होगा और इसके अतिरिक्त इस एजेंसी के पास उत्पाद के द्वारा व्यक्तिगत नुकसान, सम्पति का नुकसान या फिर कोई शारीरिक रूप से शिकायत होने की जाँच, जुर्माना, उत्पादन की वापसी आदि के अधिकार होंगे |  


उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2018 (Consumer Protection Act 2018) को उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री राम विलास पासवान ने 5 जनवरी को लोकसभा में पारित किया था | इस नए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को 1986 उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (consumer protection act) की जगह पास किया है | इस अधिनियम के तीन मुख्य उद्देश्य है |

consumer protection bill 2018

जिसमे सबसे पहले है उपभोक्ता, कोई भी व्यक्ति जो कोई वस्तु खरीदता है या किसी सेवा का उपयोग करता है उपभोक्ता  (consumer) कहलाता है | वह व्यक्ति उपभोक्ता नहीं कहलाता पुनः बेचने के लिए या अन्य किसी व्यपारिक उद्देश्य से खरीदता है | उपभोक्ता के अंतर्गत वह सभी व्यक्ति उपभोक्ता के वर्ग में शामिल होता है जो बाजार से या फिर ऑनलाइन माध्यम से उत्पाद और सेवाओं को खरीदता और उसका इस्तेमाल करता है | 


उपभोक्ता के अधिकार के अंतर्गत उन वस्तुओ और सेवाओं को उपभोक्ता में सुरक्षित करता है जोकि मनुष्य के जीवन को नुकसान पंहुचा सकती है | शॉपकीपर को वस्तु और सेवाओं की मात्रा, गुड़वक्ता, शुद्धता और मूल्य आदि के बारे में सूचित करना अनिवार्य होगा | गलत या फ्रॉड बिज़नेस के उपयोग पर सजा का प्रावधान है, इसलिए बिजनेसमैन किसी प्रकार के उपभोक्ता फ्रॉड (consumer fraud) करने से सावधान रहे | 

उपभोक्ता के अधिकार के रक्षा के लिए सरकार के द्वारा उपभोक्ता संरक्षण समिति (consumer protection committee) की स्थापना की | यह उपभोक्ता के अधिकारों का उल्लंघन, गलत विज्ञापनों, गलत व्यपार से उपभोक्ता के अधिकारों का संरक्षण (protection) करेगी | इस समिति के अंतर्गत एक जाँच दल होगा, जोकि गलत व्यपारी मामलो की जाँच करेगा | 


जानते है इसकी मुख्य विशेषताएं क्या है : 

  • इस विधेयक के अंतर्गत एक उपभोक्ता संरक्षण समिति (consumer protection committee) बनाने का निर्णय लिया गया है, जिसके द्वारा उपभोक्ता के विवादों को हल किया जायेगा |
  • उपभोक्ता संरक्षण समिति (consumer protection committee) के पास जिला स्तर पर 1 करोड़ रुपये के मामलो पर सुनवाई की जा सकेगी, जबकि राज्य स्तर पर सीमा 10 करोड़ तक होंगी | उपभोक्ता के पास कोई कमी पायी जाने पर समिति उत्पाद को वापस लौटाने, उसकी कीमत लौटाने, जुर्माना लगाने का प्रावधान लागू करेगी | 
  • यह समिति दोषी व्यक्तियों और संस्थानों पर लगभग 10 लाख तक का जुर्माना लगा सकती है और दूसरी बार दोषी पाए जाने पर यह जुर्माना 50 लाख रुपये तक खींचा जा सकता है |
  • इस समिति के द्वारा गलत विज्ञापनों पर रोक लगाई जाएगी और ऐसी स्थिति में दोषी पाए जाने पर 2 साल की सजा का प्रावधान है और यदि फिर भी यह गलती दोहराई गयी तो सजा बढ़ा कर 5 साल तक हो सकती है | 
  • इस नए प्रावधान के अनुसार विज्ञापन में काम करने वाले व्यक्तियों को भी विज्ञापन में दिखाए जाने वाली वस्तुओ और उत्पाद की जाँच की जिम्मेदारी होंगी | 
  • विज्ञापन में किसी भी तरह की गलत जानकारी प्राप्त होने पर प्रसिद्ध व्यक्ति पर भी एक साल का प्रतिबन्ध लगाया जायेगा और दुबारा यह गलती दोहराने पर एक साल से बढ़ा कर तीन साल तक कर दिया जायेगा |  
  • उपभोक्ता के संरक्षण (protection) में दिए गए आदेशों का पालन ठीक उसी तरह से होगा जिस तरह से कोर्ट के आदेशों का पालन होता है | 
  • उपभोक्ता के हितो में संरक्षण (protection) के लिए राष्ट्रीय आयोग किसी भी योग्य व्यक्ति या संसथान की मदद ले सकता है | इस नए विधेयक के अंतर्गत उपभोक्ता शिकायत (consumer complaint) की स्थिति में अपनी शिकायत ऑनलाइन (complaint online) कर सकता है और सुनवाई भी वीडियो कॉन्फ्रेन्स के द्वारा उतनी ही जल्दी हो जाएगी | 


जानते है इस विधेयक के अंतर्गत किन किन मामलो पर सुनवाई की जाएगी : 
  • इस विधेयक के अंतर्गत अनुचित अनुबंध पर सुनवाई की जाएगी | अगर किसी भी तरह से उपभोक्ता के अधिकारों (rights of consumer) का हनन होता है तो उस पर जुर्माने का प्रावधान किया गया है | 
  • यदि किसी उत्पादक द्वारा ख़राब माल बेचा जाता है और अच्छी सेवाएं उपलब्ध नहीं कराई जाती तो इन सभी मामलो की सुनवाई इस विधेयक के अंतर्गत की जाएगी |
  • अगर किसी विक्रेता द्वारा मिलावटी सामान बेचा जाता है या उसे रखा जाता है तब भी उपभोक्ता इस विधेयक के अंतर्गत शिकायत (complaint) कर सकता है | 
  • अगर सेवा प्रदाता द्वारा समय पर सेवा प्रदान नहीं की जाती तो इस विधयेक के अंतर्गत के उपभोक्ता शिकायत दर्ज कर सकता है | 
  • ऑनलाइन खरीदारी (online shopping) करवाने पर पहले मूल्य चुकाने और बाद में वस्तु नहीं उपलब्ध कराने, गलत वस्तु उपलब्ध कराने पर और वस्तु वापस करने पर पैसा वापस न होना जैसे मामलो की सुनवाई इस विधयेक में सुनवाई की जाएगी |  
  • अगर किसी सेवा द्वारा आपके सामान और सेवा का गलत विज्ञापन किया जाता है तो उपभोक्ता को गलत जानकारी प्रदान करता है | इस स्थिति में भी इस विधेयक में सुनवाई की जाएगी | 
  • इस संशोधन के द्वारा उपभोक्ता मामलो (consumer affairs) की सुनवाई जल्दी हो पायेगी और विक्रेता और संस्थान पर करवाई उचित हो सकेगी और उनके अन्दर दर भी बना रहेगा |  
अगर आपकी कोई भी उपभोक्ता शिकायत (consumer complaint) है तो अपनी उपभोक्ता शिकायत ऑनलाइन दर्ज (file complaint online) करे |