Friday, 23 November 2018

Labor Law in India - Employment Law in India

Labour Law in India
I am going to discuss Labor law in India. This law is also known as Employment Law.

Labor means that productive work which especially involves physical work and must be done for wages. 

Labor Law Categories

Labor law mainly categorized in following law, which are given as below: 

Collective Labor Law: It regulates the tripartite relationship between the employee, the employer, and the trade union.

Individual Labor Law: It regulates employee's rights at work. 

Functional Area of Labor Law

Labor Law mainly covers:

Industrial Relationship: It is related to the certification of unions, Labor-management relations, collective bargaining, and unfair Labor practices. 

Workplace Health and Safety: It is related to health and safety of workers.

Employment Standards: It is about leave, annual leave, working time, unfair terminations, minimum wage, delivery procedures, and compensation payment. 

Purpose of Labor Legislation 

There are some of the following main purposes of labor law: 

  • It establishes a legal system, which facilities productive individual and collective employment relationships, and ultimately a productive economy.
  • It provides a system within which employers, workers, and their representatives can interact with regard to work-related issues. Further, it serves as an important vehicle for maintaining harmonious industrial relationships based on workplace democracy. 
  • It provides a clear and constant remainder and guarantee of fundamental principles and rights at the workplace. 

Constitutional Provisions

Part 3: Fundamental rights

Article 14: Equality before the law and equal protection of the laws. 
Article 15: No discrimination on the grounds of sex, caste, religion, color, race, and place of birth. 
Article 16: Equal opportunity in employment (no discrimination on the grounds discussed in Article 15).
Article 19(1)c: It gives the right to form associations or unions. 
Article 23: Strictly prohibits all sorts of trafficking and forced Labor. 
Article 24: Strictly prohibits child Labor (below 14 years old) in hazardous factory/ industry.

Part 4: Directive Principles of State Policy

Article 38(1): Every state needs to promote the welfare of the people.
Article 38(2): Every state should minimize the inequalities in income. 
Article 41: Right to work, to education and to public assistance in certain cases. 
Article 42: It ensures human conditions of work and maternity relief.
Article 43: State shall endeavor to secure a living wage, conditions of work ensuring a decent standard of life and full enjoyment of leisure and social and cultural opportunities. 

Labor Policy in India

There are some major Labor policies in India which are given as below: 
  • Creative measures to attract public and private investment.
  • Creating new jobs
  • New social security schemes for workers in the unorganized sector. 
  • Social security cards for workers.
  • Unified and beneficial management of funds of Welfare boards. 
  • Reprioritization of allocation of funds to benefits vulnerable workers. 
  • Model employee-employer relationships.
  • Lon term settlements based on productivity.
  • Vital industries and establishment declared as "public utilities."
  • Special conciliation mechanism for projects with investments of Rs.150 crores or more. 
  • Indutrial relations committers in more sectors. 
  • Labor law reforms in tune with times. An empowered body of experts to suggest required changes. 
  • Statutory amendments for expediting and streamlining the mechanism of Labor judiciary. 
  • Amendments to industrial disputes Act in tune with the times.
  • Efficient functioning of the Labor Department.
  • More Labor sectors under the minimum wages act.
  • Child Labor act to be aggressively enforced. 
  • Modern medical facilities for workers.
  • Rehabilitation packages for displaced workers.
  • Restructuring in the functioning of employment exchanges, Computerization, and updating of the database.
  • Revamping of curriculum and course content in industrial training. 
  • The joint cell of the Labor Department and industries department to study changes in laws and rules.

If you think your employer doing your exploitation then you can file a complaint against the company at Voxya, an online complaint forum in India.

Voxya पर सिर्फ 5 मिनट में शिकायत कैसे दर्ज करे जानने के लिए यह वीडियो जरूर देखे | (How To File Consumer Complaints Online at Voxya Just in 5 Minutes?)

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Tuesday, 20 November 2018

10 Principle To Handle Consumer Complaints in Hindi (उपभोक्ता शिकायतों संभालने के 10 मुख्य सिद्धांत )

10 महत्वपूर्ण बाते आपको पता होना चाहिए कि कैसे ग्राहक शिकायतों को नियंत्रित किया जाये | ग्राहकों कि शिकायतों को दूर करने के कुछ सिद्धांत है जो आपको ग्राहक शिकायतों को दूर करते समय धायण देना चाहिए | कभी कभी इनमे से किसी एक भी सिद्धांत को भूलने पर काफी नुकसान सामना करना पड़ सकता है |  इस लिए उपभोक्ता शिकायतों (consumer complaints) को दूर करने में किसी भी प्रकार का संकोच न करे और इन सिंद्धान्तो को बिलकुल भी न भूले |   

हम को कुछ सिद्धांत और युक्तियाँ बताने जा रहे जो आपको उपभोक्ता शिकायत (consumer complaint) को संभालते समय ध्यान में रखना चाहिए, जो इस प्रकार है | 

1. मन को स्थापित करे (Mind Set Up)

अगर आप लोगो को किसी प्रकार की उत्पाद और सेवाएं दे रहे है तो संभव है कि आपको उपभोक्ता शिकायतों (consumer complaints) का सामना करना पड़ सकता है | जैसा कि आप जानते है कि "ग्राहक राजा होता है" और "ग्राहक हमेशा सही होता है" | ये उपभोक्ता शिकायते और प्रतिक्रिया आपकी सेवाओं और प्रोडक्ट को और अच्छा करने में आपकी मदद करेंगी | 

2. विनम्र बने (Be Polite)

जब आप किसी भी प्रकार की उपभोक्ता शिकायत (consumer complaint)को सँभालने जा रहे होते है तो आपका विनम्र होना बहुत जरूरी होता है | चाहे वह मौखिक रूप से हो या फिर लिखित रूप में | अगर आप लिखित रूप में से उपभोक्ता शिकायत (consumer grievance) का जवाब दे रहे है तो तो आपको स्पष्ट शब्दों का प्रयोग करना चाहिए  और आपको उतर देते समय आपको अपने द्वारा लिखी गयी पंकितयों को दुबारा पड़ना चाहिए |


3. ध्यान से सुने (Listen Properly)

अगर अआप्के पास कोई भी उपभोक्ता किसी भी प्रकार की शिकायत आपके पास लेके आता है तो आपके लिए ये जरूरी है कि आप उपभोक्ता शिकायत (consumer grievance) को ध्यान से सुने क्योकि अगर आपको उपभोक्ता शिकायत को ध्यान से नहीं सुनते है तो उपहोक्त कि समस्या को दूर करने में और उपभोक्ता शिकायत को का उचित जवाब देने और समझाने में दिक्कत होंगी | 

4. शांत रहे  (Remaining Calm)

कभी भी आपको उपभोक्ता से उलझने कि जरूरत नहीं है अगर आप ऐसा करते है उसमे आपकी ही गली कही जायेगी| यहाँ पर आपको तथ्यों के साथ उपभोक्ता को जवाब देना चाहिए और जो उचित हो वही जवाब देना चाहिए | ये आपकी ड्यूटी ही नहीं आपका कर्तव्य है | अगर कोई ग्राहक बहुत ही जयादा उग्र होता है या गुस्सा करता है तो आप सिक्योरिटी की मदद बिना किसी झिझक के ले सकते है |   

5. सहानभूति दिखाए (Show Sympathy)

अगर कोई उपभोक्ता परेशान है तो आप उसको और परेशान न करके उसके प्रति साहनभूति दिखाए और जिससे उपभोक्ता और ग्राहक को लगेगा की आप उसका दर्द समझ रहे जिससे वो आप भरोशा करेगा और धर्य बना के रखेगा |

6. माफ़ी मांगे (Seek Apology)

अगर किसी भी प्रकार की गलती होती है तो सबसे पहले आपको माफ़ी मांगनी चाहिए | इसका मतलब ये नहीं है आप उपभोक्ता और ग्राहक की शिकायत से सहमत है | इसका मतलब यह है कि ग्राहक आपकी सेवाओं और प्रोडक्ट से किसी प्रकार से असंतुष्ट है और उसके लिए माफ़ी मांग रहे है | 

7. दूसरे को दोष न दे (Never Blame Others)

जी हां, अगर आप कि कंपनी से किसी भी वजह से ग्राहक संतुष्ट नहीं होता है तो आपको कभी भी उसके लिए और व्यक्ति पर उसका दोष देने कि जरूरत नहीं है | कभी कभी क्या होता है की दूसरे डिपार्टमेंट की गलती थी यह सही तरीका नहीं है | आपको अपने कंधो पर जिम्मेदारी लेते हुए उपभोक्ता शिकायतों (consumer complaints) को सुन्ना चाहिए और उसका दूर करने में उपभोक्ता की पूरी मदद करनी चाहिए | अगर आपसे वो शिकायत दूर नहीं हो पा उस कॉल को किसी अन्य अनुभवी प्रतिनिधि को ट्रांसफर कर दे |

8. बहाने न बनाये (Don't Make Excuse)

कोई भी ग्राहक बहाने सुनने की लिए तैयार नहीं होता है वो चाहता ही उसका काम जल्द से जल्द हो जाये | जैसे कि "आज  स्टाफ कम है इस वजह से काम हो पाया|" या "आज बहुत व्यस्त थे" इस तरह के बहाने आपके सेवाओं की कमीयो को दर्शाता है | इस वजह से आपकी छवि उपभोक्ता की नजरो में फीकी पड़ जाती है और वह दूसरी कंपनी की तरफ भागने लगता है | 

9. ग्राहक को गलत करने की कोशिश न करे (Do not try to make your customer wrong)

जैसा की हम आपको पहले ही बता चुके है "ग्राहक राजा होता है" और वह हमेशा ही सही रहता है | अगर आप जानते है कि आपका ग्राहक गलत है तो भी आप सीधे गलत कहना सही नहीं रहेगा | आपको तार्किक रूप से ग्राहक को समझाना चाहिए और बताना चाहिए कि आप उनकी मांग को क्यों पूरा नहीं कर सकते है |

10. ईमानदार बने (Be Honest)

ग्राहक कोई शिकायत करता है तो आप उसकी शिकायत को दूर करने की कोशिश  करे और जिम्मेदारी ले की ग्राहक आपकी सेवाओं से खुश रहे |  आपको सिर्फ उपभोक्ता शिकायत (consumer complaint) को ही नहीं दूर करना है बल्कि आपको उससे ग्राहक सेवाओं से संतोष है या नहीं इसके भी जाँच आपको निरंतर करते रहना चाहिए |  

Friday, 16 November 2018

उपभोक्ता फोरम ने अत्यधिक बिल के लिए अस्पताल को जड़ा तमाचा | (Consumer Forum Slaps Fine On Hospital For Exorbitant Bill - Kerala Consumer Case)

Medical BNegligence Complaint
कोल्लम (KOLLAM): जिला उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (district consumer complaints redressal forum) ने एक एंजियोप्लास्टी सर्जरी (angioplasty surgery) के बाद अस्पताल में मारे गए एक मरीज के रिश्तेदारों से अत्यधिक बिल एकत्रित करने के लिए कोल्लम के Sankar’s Hospital पर फाइन लगाया |

के. रामचंदरना नायर, जोकि विभिन्न देवास्वोम बोर्ड कॉलेज के प्रधानाचार्य (hospital) थे, जिनका निधन 17 जून 2012 में Sankar’s Hospital हो गया था | निधन के तुरंत बाद हॉस्पिटल ने 12,891/- रुपये का प्रिंटेड बिल और 58,000/- रुपये का हस्तलिखित बिल उनके परिवार वालो को पकड़ा दिया और उनके शरीर को हॉस्पिटल से ले जाने के के लिए जोर देने लगे | परिवार के सदस्यों ने बिना देर किये पैसे को भरा हो शरीर को ले लिए |

कुछ दिनों के बाद, के. रामचंदरना नायर लड़के नंदकुमार, जोकि कोल्लम बार ((Kollam Bar) में अभ्यासरत वकील  है, हॉस्पिटल पहुंचे और हस्तलिखित बिल के डिटेल के विषय में पूछने लगे | हॉस्पिटल (hospital) के अथॉरिटी ने कहां की 30,000/- रुपये डॉक्टर की फीस थी और बाकी मेडिकल प्रोडक्ट्स और हॉस्पिटल का चार्ज था |  

हालांकि, सर्जरी करने वाले वाले डॉक्टर ने प्रकश डालने पर नंदकुमार को पता चला कि अस्पताल के दावे झूठे थे | इसके बाद उसने उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (district consumer complaints redressal forum) के माध्यम से अस्पताल से मुआवजे की मांग की | 

सुनवाई के समय, हॉस्पिटल (Hospital) अपने क्लेम को सम्बंधित दस्तावेजो के जरिये यकीन दिलाने में फेल गए | फोरम (Forum) ने अस्पताल के इस दावे को खारिज कर दिया कि उन्हें बिल का ब्योरा बताने की जरूरत नहीं है और पाया की किसी भी पेशेंट और उनके परिवार वालो को इलाज की पूरी जानकारी होना का अधिकार है |   

फोरम (Forum) ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता से लिए गए अत्याधिक बिल को 30 दिनों में बिल की डिटेल के साथ वापस किया जाये |  अगर हॉस्पिटल ये नहीं कर पाता है  अस्पताल को जुर्माने के रूप में 25,000/- रुपये देने होंगे याचिकाकर्ता और साथ ही साथ 50,000/- रुपये मुआवजे के रूप में और 5,000/- रुपये कानूनी खर्च के लिए भी देने होंगे | 

हालांकि, Sankar’s Hospital के मुख्य समन्वयक एस. सुवर्ण कुमार ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन राज्य उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में (state consumer redressal forum) अपील दायर करेगा | 

उन्होंने कहां, "हमने निश्चय किया है कि हम अपनी बेगुनाही को साबित करने के लिए अपील दायर करेंगे | शिकयतकर्ता अभ्यासरत वकील है जिसने हेरफेर तथ्यो से जिला फोरम को प्रभावित किया है | मरीज के रिश्तेदारों को दिया हस्तलिखित बिल स्टेंट खरीदी का बिल | यह वह बिल है जो कंपनी के द्वारा दिया गया बिल है जो स्टेंट (Stent) प्रदान करती है | "

Content source: TOI

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Monday, 12 November 2018

14 ऐसे कानूनी अधिकार जो हर भारतीय को जानने चाहिए | (14 Legal Rights Indian Must Need To Know)

14 ऐसे कानूनी अधिकार जो हर भारतीय को जानने चाहिए वो इस प्रकार है :

  • 1. ड्राइविंग के समय यदि आपके 100ml ब्लड में अलकोहल का लेवल 30mg से ज्यादा मिलता है तो पुलिस बिना वारंट आपको गिरफ्तार क्र सकती है | (मोटर वाहन एक्ट, 1988 सेक्शन -185, 202
  • 2. किसी भी महिला को शाम को 6 बजे के बाद और सुबह के 6 बजे से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है |  (आपराधिक प्रकिया संहिता, सेक्शन 46)
  • 3. कोई भी होटल चाहे वो 5 स्टार क्यों न हो आपको पानी पीने और वाशरूम का इतेमाल करने से नहीं रोक सकता है | (भारतीय सारिउस अधिनियम 1887) 
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  • 4. कोई भी शादीशुदा व्यक्ति किसी अविवाहित लड़की या विधवा से उसकी सहमति से शारीरिक सम्बन्ध बनता है तो वो अपराध की श्रेणी में नहीं आता है | (भारतीय दंड संहिता व्यभिचार, धारा 498)
  • 5. यदि दो वयस्क लड़का और दो वयस्क लड़की अपनी मर्जी से लिव इन रिलेशनशिप में रहना चाहते है तो यह गैर कानूनी नहीं है और इन दोनों से पैदा होने वाली संतान गैर कानूनी नहीं है और लड़के को अपने पिता की सम्पति में हक भी मिलेगा |  (घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005)
  • 6. एक पुलिस अधिकारी हमेशा ही ड्यूटी पर रहता है, चाहे उसने यूनिफार्म पहनी हो या न पहनी हो | यदि कोई व्यक्ति इस अधिकारी से कोई शिकायत करता है तो वह यह नहीं कह सकता कि वह पीड़ित कि मदद नहीं कर सकता क्योकि वह ड्यूटी पर नहीं है | (पुलिस एक्ट, 1861
  • 7. कोई भी कंपनी गर्भवती महिला को नौकरी से नहीं निकाल सकती, ऐसा करने पर अधिकतम 3 साल की सजा हो सकती है | (मातृत्व लाभ अधिनियम,1961)
  • 8. टैक्स उलंघन के मामले में, कर वसूली अधिकारी को गिरफ्तार करने का अधिकार है लेकिन गिरफ्तार करने से पहले उसे आपको भेजना पड़ेगा | केवल टैक्स कमिश्नर ही यह फैसला करता है की आपको कितनी देर तक हिरासत में रहना है | (आयकर अधिनियम, 1961)
  • 9. तलाक़ निम्न अधिकारों पर लिया जा सकता है : हिन्दू मैरिज एक्ट के तहत कोई भी (पति या पत्नी) कोई भी पति या पत्नी तलाक़ के लिए अर्जी दे सकता है | व्यभिचार (शादी के बहार रिश्ता बनाना), शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना, नपुंसकता, बिना बातये छोड़ जाना, हिन्दू धर्म छोड़ कर कोई और धर्म अपनाना, पागलपन, लाइलाज बीमारी, वैराग्य लेने और सात साल तक कोई अता पता न होने आधार पर तलाक़ की अर्जी दाखिल की जा सकती है | (हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा -13
  • 10. मोटर वाहन अधिनियम की धारा 129 में वाहन चालकों को हेलमेट लगाने का प्रावधान है | मोटर वाहन अधिनयम की धारा 128 में बाइक पर दो व्यक्तियों का बैठने का प्रावधान है | लेकिन ट्रैफिक पुलिस के द्वारा गाड़ी या मोटरसाइकिल से चाभी निकालना बिलकुल भी गैर कानूनी है इसके लिए आप चाहे तो कांस्टेबल/अधिकारी के खिलाफ कानूनी कारवाही भी कर सकते है | (मोटर वाहन अधिनियम)
  • 11. केवल महिला पुलिसकर्मी ही महिला को गिरफ्तार कर सकती है, पुरुष पुलिसकर्मी को महिला को गिरफ्तार करने और थाने में लेन का कोई भी अधिकार नहीं है | इतना ही नहीं महिला शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे के बीच में थाने जाने से मना भी कर सकती है | गंभीर अपराध के मामले में मजिस्ट्रेट से लिखित आदेश प्राप्त होने पर ही पुरुष पुलिसकर्मी किसी महिला को गिरफ्तार कर सकता है |  (दंड प्रक्रिया संहिता, 1973)
  • 12. बहुत ही कम लोग इस बात को जानते है कि यदि उनका गैस सिलिंडर खाना बनाते समय फट जाये तो आप जान और माल की भरपाई के लिए गैस कंपनी से 40 हज़ार रुपये तक की सहायता के हकदार है |     
  • 13. आपको यह भी जानके अचरज होंगा कि यदि आप किसी कंपनी से किसी त्यौहार के मौके पर कोई गिफ्ट लेते है तो यह रिश्वत की श्रेणी में आता है | इस जुर्म के लिए आपको सजा भी हो सकती है | (विदेशी अंशदान नियमन अधिनियम, )
  • 14. यदि आपका किसी दिन चालान (बिना हेलमेट या किसी अन्य कारण से) काट दिया जाता है तो फिर दुबारा उसी अपराध के लिए आपका चालान नहीं काटा जा सकता है | (मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, 2016
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Saturday, 10 November 2018

इस Restaurant के घोटाले ने सबके होश उड़ा दिये - जानिए क्या था खास विवेक बिंद्रा की केस स्टडी में | (Restaurant - Vivek Bindra Case Study)

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कई सारे रेस्टोरेंट (Restaurant) को Zomoto, Foodpanda, Swiggy, uber eats ने लगभग 10500 रेस्टोरेंट्स को अपने लिस्ट में से हटा दिया है | ये वो रेस्टोरेंट्स थे जिनके पास फ़ूड सेफ्टी रेगुलेटर (Food Safety Regulator) की मान्यता नहीं थी |        

क्योकि कई सारी रेस्टॉरेंट्स (Restaurant) ऐसे थे जिनके पास ऐसी व्यवस्था नहीं थी जो उन रेस्टॉरेंट्स के पास होनी चाहिए थी | जैसे लल्लू राम नाम का हलवाई रेस्टोरेंट्स (Restaurant) में बैठ कर खाना बना रहा पर उसके पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है जिससे वहां पे वेंटिलेशन हो सके और वहां का धुआँ आसानी से बहार निकल सके , जिसके कारण खाने के बनते समय जो धुआँ उठता है जब ऊपर की छत पे लगता और धीरे जमने लगता है और उसमे छोटे छोटे कीड़े और कॉक्रोच पैदा होने लगते है और दुबारा खाना बनता है तो वो भाप जब ऊपर उठती है तो वही कीड़े, कॉक्रोच और कई प्रकार के माइक्रो बैक्टीरिया खाने में गिरते है और वही खाना आपको रेस्टॉरेंट्स (Restaurant) के द्वारा खाने के रूप में मिलते है | ये कभी कभी आपको आँखों से दिखाई नहीं देते है और न की स्वाद में और महक में पता चलते है क्योकि खाने बनाने में ऐसे मसलो को इस्तेमाल होता है की उस समय आपको खाने के महक और स्वाद लाजवाब लगते है लेकिन उसका पता आपको दूसरे दिन या कुछ दिनों के बाद पता चलता है जब आप बीमार पड़ते है या जब को पेट में कुछ कड़बाड़ी महसूस होती है |

इस तरह के कई मामले सामने आ चुके है जहां पे क्रॉकरोच या छिपकली मिलने की शिकायते आयी है और इस तरह की शिकायते भी Voxya ऑनलाइन कंस्यूमर फोरम (online consumer forum) पर उपभोक्ताओं के द्वारा की गयी है |  

इतना ही नहीं इन रेस्टोरेंट्स (Restaurantमें तो चोप्पिंग के लिए भी उचित व्यवस्था नहीं होती है | ये रेस्टोरेंट्स (Restaurant) चोप्पिंग के लिए लकड़ी के सीट का इस्तेमाल करते है जिसके कारण आपको कभी कभी खाने में आपको उस लकड़ी कुछ अंस जो चोप्पिंग के दौरान आपके खाने में आ जाते है और आपको बाद में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है |

अगर वेज और नॉन-वेज के बात करे तो मीट को काटते समय कभी कभी लकड़ी की चोप्पिंग शीट की दरारों पर पर खून लग जाता है और बाद में उसी पर पनीर को काट के आपके सामने पनीर को पेश किया जाता है | जब की मान्यता के अनुसार चोप्पिंग के लिए स्टेनलेस स्टील का प्रयोग किया जाता है | 

FSSAI के  नियमो के मुताबिक अगर आप अपना रेस्टोरेंट चला रहे है तो आपके पास साफ़ सफाई  और धुआँ और  तेल बहार निकल जाये ऊपर चिपके नहीं ऐसे व्यवस्था होना आवश्यक है |     

रेस्टोरेंट्स (Restaurantके पास कोल्ड स्टोरेज (cold storage)की व्यवस्था होनी चाहिए अगर रेस्टोरेंट्स (Restaurant) के पास कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था नहीं है तो रेस्टोरेंट्स खाने पीने चीजों जल्दी है खराब हो सकती है, फंगस लग सकते है और वो स्वस्थ के लिए काफी नुक्सानदायक हो सकता है | 

खाना पैकेजिंग के लिए उच्च क्वालिटी के पत्तलो का उपयोग होना चाहिए क्योकि अगर पत्तल उच्च क्वालिटी का नहीं है तो गर्म खाना रखते ही उसकी प्लास्टिक पिघलने लगती है और आपकी सेहत को नुकसान पंहुचा सकती है | 

खाने के बर्तन की सफाई रेस्टोरेंट्स वालो को ध्यान में रखनी चाहिए क्योंकी सही सफाई न होने के कारण आपको डायरिया, लूज़ मोशन, इंफ्लुएंजा, पेट में अलसर हो सकता है | होता यह है सफी करते समय बर्तन को सिर्फ पानी में डुबाके कपडे से पोच देते है जिससे कभी कभी कपडे की सफाई न होने के कारण वो बैक्टीरिया आपकी प्लेट में लग जाते है और वो ही आपको नुसान करते है | FSSAI के अनुसार रेस्टोरेंट्स (Restaurant) के पास खुद का एक डिश वॉशर होना चाहिए | 

इस तरह से कई रेस्टोरेंट्स (Restaurant) है जो उचित व्यवस्था के साथ ग्राहकों को सेवाएं नहीं दे रहे है | 

अगर आपकी कोई भी शिकायत किसी भी रेस्टोरेंट (Restaurant) के खिलाफ है तो आप अपनी शिकायत को Voxya ऑनलाइन कंस्यूमर फोरम (online consumer forum) पर दर्ज करके जल्द से जल्द समस्या का समाधान पा सकते है | 
Content Source: Vivek Bindra Video


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Monday, 5 November 2018

महाराष्ट्र उपभोक्ता फोरम ने डेवलपर्स को फ्लैट खरीदारों को 2 Lakh रुपए क्षतिपूर्ति देने के आदेश दिए (Maharashtra consumer forum orders developers to pay Rs 2 Lakh compensation to flat buyers)

महाराष्ट्र (Maharashtra) : राज्य उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग (state consumer dispute redressal commission) ने निर्देश दिया कि एक दंपति जिन्होंने मुलुंड में एक फ्लैट खरीदा था, डेवलपर्स द्वारा फ्लैट पर कब्जा नहीं दिए जाने के लिए मुआवजे के रूप में 2 लाख रुपए का भुगतान किया जाए |  दंपति ने छह विरोधियों के खिलाफ आयोग की तरफ रुख किया, जिनमे वो भी शामिल थे जिसके पास स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी प्रोजेक्ट (Slum Rehabilitation Authority Project) के तहत में संपत्ति के विकास अधिकार थे, और दूसरी कंपनी जिसने इमारत के निर्माण कार्य के लिए दूसरे को हस्तांतरित किया और अन्य भागीदार भी शामिल थे |

शिकायत (grievance) के अनुसार, दंपति ने मई 2010  में 51 लाख रुपए से अधिक राशि में मुलुंड में एक घर की बुकिंग की थी| कुछ राशि बुकिंग के दौरान और कुछ बाद में भुगतान किया था | अक्टूबर 2010 में, एक आबंटन पत्र उन्हें जारी किया गया था, जिसमे 30 लाख रुपए की रसीद स्वीकार करने को कहा गया था | शिकायतकर्ताओं (complainants) ने कहा कि जबकि उपभोक्ताओं (consumers) को को उचित समय के भीतर उनके घर पर अधिकार मिल जाना चाहिए था, जबकि काफी देर बाद में ऐसा नहीं किया गया | 

उन्होंने ने फोरम (Forum) में अपनी बात कही और कहां कि अभी तक फ्लैट डेवेलपर्स (developers) के हाथो में ही है और उन्हें अभी तक उसपर किसी प्रकार का अधिकार और कब्ज़ा नहीं दिया गया है | 

"यह स्थिति है कि आज तक कोई समझौता निष्पादित और फ्लैट के का अधिकार शिकायतकर्ता (complainants) को नहीं सौंपा गया और न ही दाखिला मिला| इससे यह साफ़ साफ़ पता चलता है कि यह सिर्फ दूसरी पार्टी कि सेवाओं कि कमी होने के कारण ही हुआ है|" राज्य आयोग (state commission) ने कहां और आदेश दिया कि 9 फीसदी ब्याज का भुगतान शिकायतकर्ताओं (complainants) फ्लैट सौंपने तक किया जाये और साथ ही साथ 2 लाख रुपये  मुआवजे के रूप में किया जाये|" जैसे ही शिकायतकर्ताओं (complainants) को उनके द्वारा बुक किए गए फ्लैट पर कब्जा नहीं मिल सका,  उन्हें मानसिक व्यथा का सामना करना पड़ा,  इसलिए, शिकायतकर्ताओं (complainantsकी गिनती पर कुछ मुआवजे के हकदार हैं|" आयोग ने कहा, जब शिकायतकर्ताओं (complainantsने 10 लाख रुपये मुआवजे के रूप में मांग की, हालांकि, 'अत्यधिक' था | 

इस तरह पूरे मामले का निपटारा राज्य आयोग (state commission) ने किया |

content source: indianexpress

अगर आपकी किसी भी प्रकार की उपभोक्ता शिकायत है और आप अपनी शिकायत का निपटारा जल्द से जल्द करना चाहते है तो आप Voxya ऑनलाइन कंस्यूमर कंप्लेंट फोरम (online consumer complaint forum) पर अपनी शिकायत (complaint) करना न भूले |

Voxya पर सिर्फ 5 मिनट में शिकायत कैसे दर्ज करे जानने के लिए यह वीडियो जरूर देखे | (How To File Consumer Complaints Online at Voxya Just in 5 Minutes?)

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Friday, 2 November 2018

ट्रैफिक पुलिस से कैसे निपटे और क्या है नियम जरूर जानिए (Know How To Deal With Traffic Police)

कुछ ट्रैफिक के नियम जिनके बारे में आपको जानना चाहिए | (Know About Some Traffic Rules)

image source: telanganatoday
अगर सड़क पे चलते हुए कोई ट्रैफिक हवलदार आपके गाड़ी को रोक के आपको पेपर्स दिखने की मांग करता है तो आप उसको साफ़ साफ़ मन क्र सकते है | इतना ही नहीं आप उसकी शिकयत उसके सीनियर से भी कर सकते है | ट्रैफिक नियम  (traffic rules) के अनुसार एस. आई. (S.I.) रैंक या फिर उससे बड़े पद का अधिकारी ही  आपसे आपके कागज मांगने का अधिकार होता है | 

किसी भी ट्रैफिक हवालदार को आपको अरेस्ट या फिर गिरफ्तार करने का और आपके वहां को जब्त करने का कोई अधिकार नहीं होता है | बल्कि वो आपसे POC(ploicer under control) की डिमांड भी नहीं कर सकता है | क्योकि ये अधिकार केवल RTO अधिकारियो का होता है | 

इसी तरह से अगर आप किसी भी तरह से ट्रैफिक नियमो (traffic rules) का उल्लंघन करते है तब भी उस हवलदार को आपकी गाड़ी से चाभी निकलने का कोई भी अधिकार नहीं है | 

द इंडियन मोटर व्हीकल एक्ट सेक्शन 132 के अनुसार, ट्रैफिक नियम तोड़ने पर आपसे पनेलिटी भी सिर्फ असिस्टेंस सब इंस्पेक्टर 1 स्टार, सब इंस्पेक्टर 2 स्टार, या फिर पुलिस इंस्पेक्टर 3 स्टार ही वसूल कर सकता है | 

ट्रैफिक हवलदार सिर्फ उनकी मदद कर सकता है, लेकिन ट्रैफिक हवलदार किसी भी प्रकार की पेनलिटी आपसे वसूल नहीं कर सकता है | 

अगर पुलिस आपसे सिग्नल तोड़ने के दौरान, या फिर आपकी गाड़ी पर 2 से ज्यादा लोग बैठे होने की सम्भावना के दौरान, या फिर भारी वाहनों पर सवारी बैठने के दौरान, या फिर शराब पी कर या कोई और नशा लेके गाड़ी चलाने के दौरान या फिर मोबाइल पर बात करवाने के दौरान, तेज़ गाड़ी चलाने के दौरान पुलिस आपको पकड़ती है तो पुलिस आपके लाइसेंस को जब्त कर सकती है और उनको इसका पूरा अधिकार भी दिया गया है | 

अगर आप ट्रैफिक नियम को तोड़ते हुए पकड़े जाते है तो आप पे 100 रुपये का फाइन लगाया, लेकिन इससे ज्यादा का फाइन सिर्फ A.S.I (Assistance Sub Inspector) और SI (Sub Inspector) ही लगा सकता है लेकिन 100 रुपये से ज्यादा फाइन ट्रैफिक हवलदार नहीं लगा सकता है | 

image source: amarujala
अगर कोई ट्रैफिक पुलिस वाला बिना वर्दी पहने चलना कटता है तो उसका इस तरह करने का कोई भी अधिकार नहीं है | आप उसको रोक सकते है |

आपको अपने घर से निकलते समय आपने गाड़ी का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट(RC), गाड़ी का इन्सुरेंस (Insurance), पलॉईसर अंडर कंट्रोल (POC), ड्राइविंग लइसेंस हमेशा अपने साथ रखे |   

ट्रैफिक पुलिस कितने तरह के चालान वसूल करते है |

1. On the spot challan (ऑन द स्पॉट चालान)

 अगर आप ट्रैफिक नियम तोड़ते हुए रंगे हाथ पकड़े जाते है तो आपसे तुरंत चालान काट कर पनेलिटी वसूल की जाती है | अगर आप तुरंत पेनलिटी नहीं भर पाते है तो पुलिस आपसे तुरंत ड्राइविंग लाइसेंस ले लेती है और आपको चालान दे देती है | जिसे भरने के बाद  ही ड्राइविंग लाइसेंस वापस मिल सकता है | 

2. Notice Challan (नोटिस चालान)

अगर आप किसी ट्रैफिक नियम को तोड़ते है और भाग जाते है तो उस स्थिति में आपकी गाड़ी का नंबर नोट करके चालान गाड़ी मालिक के घर पे पंहुचा देते है | जिसको भरने के लिए पूरे एक महीने का समय दिया जाता है | अगर आप एक महीने उस चालान को नहीं भरते है तो फिर चालान को कोर्ट भेज दिया जाता है | 

3. Court Challan (कोर्ट चालान )

तीसरा चालान होता है कोर्ट (court) का चालान, इस चालान को शायद किसी ट्रैफिक नियम को तोड़ने पर ही बनाया जाता है | इस चालान में पेनलिटी के साथ साथ सजा का भी प्रावधान है | जैसे की आप किसी प्रकार नशा करने  के बाद गाड़ी चलाते है और फिर आप पकड़े जाते है तो इस स्थिति में चालान ऑन द स्पॉट ही बना दिया जाता है, लेकिन उसकी पनेलिटी भरने के लिए आपको कोर्ट जाना पड़ेगा | 

अगर आपके साथ किसी कंपनी ने प्रोडक्ट या सेवाओं को लेके किसी भी प्रकार का फ्रॉड या धोकाधड़ी की है तो आप अपनी शिकयत Voxya ऑनलाइन कंस्यूमर कंप्लेंट फोरम (Forum) पर करना न भूले |

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Thursday, 1 November 2018

9 ऑनलाइन शॉपिंग गलतियां आपका काफी नुकसान कर सकती हैं | ( 9 Online Shopping Mistakes That Put You at Risk)

आजकल ऑनलाइन शॉपिंग का चलन काफी ज्यादा हो गया है | आप, मैं, और आपके पड़ोसी भी ऑनलाइन शॉपिंग करने लगे है | इतना ही नहीं छोटी सी छोटी चीजे लोग ऑनलाइन ही खरीदने लगे है | लेकिन ऑनलाइन शॉपिंग (online shopping) खरीदते वक़्त हम लोग कुछ बड़ी गलतियां कर देते है | जो हम लोगो का कभी भी नहीं करनी चाहिए | 

सबसे पहली गलती हम लोग ये करते है कि जब भी पेमेंट करते है तो हम लोग अपने डेबिट कार्ड और डेबिट कार्ड से ही पेमेंट करने लगते है | जो आपको बिलकुल भी नहीं करना चाहिए | यदि आपको पेमेंट करना है या तो क्रेडिट कार्ड (credit card) से करो या कैश ऑन डिलीवरी (cash on delivery) का ऑप्शन चुनो क्योकि क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड अलग अलग प्रोटेक्शन लॉ (Protection Law) के साथ आता है | 

1. क्रेडिट कार्ड और कैश ऑन डिलीवरी करे (Credit Card And Case On Delivery)

क्रेडिट कार्ड आता है FCBA(Fair Credit Billing Act) के अंदर और डेबिट कार्ड और एटीएम कार्ड आता है EFTA(Electronic Fund Transfer Act) के अंदर | क्रेडिट कार्ड में रिकवरी के लिए बेहतर विकल्प मिल जाते है जिसमे आपको पैसे वापस आसानी से मिल जाते है जबकि डेबिट कार्ड के साथ फ्रॉड हुआ तो आपको काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है |  इसलिए जब भी आप पेमेंट करे तो क्रेडिट कार्ड (credit card) या कैश ऑन डिलीवरी (case on delivery) का ही इस्तेमाल करे | 

2. समीक्षा देखे (Check Review)

जब भी आप कोई प्रोडक्ट ऑनलाइन खरीदने जा रहे तो उसके रिव्यु जरूर देखे | न केवल उस उस वेबसाइट पर जहा से आप खरीदने जा रहे है बल्कि आपको दूसरे वेबसाइट पर भी उस प्रोडक्ट के लिए रिव्यु देखना चाहिए | इसके लिए आपको गूगल पर शायद थोड़ी रिसर्च भी करनी पड़ सकती है, जिसको करना आप न भूले क्योकि अधिकतर प्रोडक्ट वाले ही अपने प्रोडक्ट के लिए अच्छे रिव्यु  करवा देते है | 

3. सेलर्स रेटिंग देखे (Check Seller Rating)

जब भी आप कोई प्रोडक्ट खरीद रहे हो तो आपको सेलर्स कि रेटिंग को देखना चाहिए | अगर सेलर का प्रोडक्ट या सर्विस अच्छी नहीं है तो कस्टमर्स के रिव्यु सेलर की रेटिंग को कम कर देते है | जिससे आपको पता चल जाता है कि सेलर लापरवाह है | अगर किसी सेलर कि रेटिंग 3  या कम है तो इसका मतलब है कि सेलर सच में लापरवाह है और आपको उस सेलर से प्रोडक्ट या सर्विस को नहीं खरीदना चाहिए |

4. वापसी पॉलिसी देखे (Check Return Policy)

बिना वेबसाइट और कंपनी कि वापसी पॉलिसी कोर्ट को पढ़े बिना कोई भी वस्तु न खरीदे | अगर को प्रोडक्ट खरीदा और वापस करना पड़ा तो कैसे वापस करेंगे, वस्तु को को वापस लेने कोई आएगा या देने जाना पड़ेगा और उसमे और कोई ज्यादा खर्च तो नहीं आएगा |  ऐसा न हो की वस्तु मागने में कम पैसे लगे है पर वापस करने में ज्यादा पैसे लग जाये | इसलिए वापसी पॉलिसी (Return Policy) जरूर पढ़े, हर वेबसाइट की वापसी पॉलिसी (Return Policy) अलग अलग होती है | 

5. सील जरूर चेक करे  (Check Seal Of Product)

सिक्योरिटी सील को देखे बिना को भी वस्तु न ले | जब भी आप कोई ऑनलाइन शॉपिंग करते है तो एक पेमेंट गेटवे आता है जहां आपको क्रेडिट कार्ड और कार्ड की डिटेल भरने को कहता है | तो वहां पर सेकुयर्टी सील जरूर देखे | अगर सेकुयर्टी सील नहीं दिखती है तो आप पेमेंट बिलकुल न करे |  

6. अनजान वेबसाइट से शॉपिंग न करे (Don't Use Unknown Website For Shopping)

अंजनी वेबसाइट से शॉपिंग न करे बहुत सी वेबसाइट बिल्कुल मार्किट में आती है और लोग शॉपिंग करने लगते है | अगर आप उस वेबसाइट पर शॉपिंग करते भी है तो आपको उसको रिव्यु कपो जरूर पढ़ने चाहिए |

7. अनजाने लिंक को क्लिक न करे (Don't Click Unknow Link)

यदि आपको कोई भी लिंक ईमेल से, फेसबुक से , मैसेज आये और व्हाट्सप्प आये या कही से भी आये तो आप उस लिंक पर बिलकुल क्लिक न करे क्योकि कभी कभी फिशिंग अटैक भी हो सकता है | 

8. वीडियो बनाये (Create Video)

आपने प्रोडक्ट आर्डर किया और प्रोडक्ट घर आ गया | तो प्रोडक्ट जैसे आपको डिलीवर करता है तो आप वही पर उसको खोल देते है लेकिन ये आपको ये नहीं करनी चाहिए हो सके तो आप प्रोडक्ट को ओपन करते हुए वीडियो बनाये क्योकि कभी कभी हम प्रोडक्ट कुछ और आर्डर करते है और डिब्बा खाली आ जाता है | होता ये है की प्रोडक्ट आपने कुछ और आर्डर किया और कंपनी ने कुछ और भेज दिया | कभी कभी ईंट, साबुन की टिकिया या फिर निरमा निकलने की शिकायते भी मिलती है | यह एक सबूत के रूप में कभी कभी उपभोक्ता को कंस्यूमर कोर्ट (consumer court) और कंस्यूमर फोरम (consumer forum) में न्याय पाने में मदद कर सकते है | अगर आप कोई महंगा प्रोडक्ट मंगाते है तो वीडियो जरूर बना ले |

9. शॉपिंग के लिए पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल न करे | (Don't Use Public Wifi For Shopping)

पब्लिक वाई-फाई का प्रयोग करते हुए कभी भी शॉपिंग न करे और पेमेंट तो बिलकुल भी न करे |  क्योकि इसमें फिशिंग अटैक, मैन इन मिडिल अटैक हो सकता है, स्नूपिंग हो सकती है, और इसके जरिये आपकी इनफार्मेशन को पता कर सकते है और आप जिस वेबसाइट का प्रयोग करते है उसी तरह से वेबसाइट बना कर आपकी डिटेल को आसानी से चुराई जा सकती है | इसलिए शॉपिंग के लिए पब्लिक वाई-फाई बिल्कुल भी भरोसा न करे | 

इस वीडियो को जरूर देखे |

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